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*प्रशिक्षण जनपद से ही आवेदन का नियम 14(1)(a) अटल नहीं, ये जाएगा हाई कोर्ट से भी और सुप्रीम कोर्ट से भी (Part 2/5) - AG*


*प्रशिक्षण जनपद से ही आवेदन का नियम 14(1)(a) अटल नहीं, ये जाएगा हाई कोर्ट से भी और सुप्रीम कोर्ट से भी (Part 2/5) - AG*

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https://fb.com/AG-1539413262801965/
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● पार्ट 1 यहां पढ़ें - https://goo.gl/WFVwGT
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*10) फिर से सरकार को लपलपाहट हुई और चयन सूची जारी करने से 2 दिन पहले 31अक्टूबर 2001 को फिर से स्टेट लेवल मेरिट को हटाकर जिला स्तर मेरिट बनाने का GO जारी किया गया। यहां यह भी बता दें कि लगभग एक दर्जन जिलों में पद शून्य थे वहीं कुछ जिलों में पद बहुत अधिक थे।(इलाहाबाद 1355, कौशाम्बी 448) और 03 नबम्बर को चयन सूची जारी कर दी गयी।* यहां यह बात उल्लेखनीय है कि चयन सूची में नाम आने से किसी को नियुक्ति का परमानेंट अधिकार नहीं मिल जाता है। ये सुप्रीम कोर्ट ने भी L.J. Diwakar v. Government of Andhra Pradesh, AIR 1982 SC 1555 और Shankarasan Dash v. Union of India, AIR 1991 SC 1612 में निर्णीत किया हुआ है।
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*11) अब इस निर्णय से स्टेट मेरिट में आने वाले लोग बाहर हो गए। कुछ जिलों में लो मेरिट वाले सिलेक्टेड वहीं कुछ जिलों में हाई मेरिट वाले भर्ती से बाहर। इसी से व्यथित होकर बलिया से अनन्त कुमार तिवारी ने जिला वरीयता के विरुद्ध संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 को आधार बनाकर अधिवक्ता शैलेंद्र के थ्रू हाई कोर्ट में याचिका WRIT A 37124/2001 दाखिल की।*
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12) सरकारी वकील का हर बार का वही ड्रामा। एडवोकेट जनरल बोले जी जज साहब, जी ये पहले उन नियमों के साथ भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए, और अब जब बाहर हो गए तो इनको मिर्ची लग रही है। जज साहब इनकी याचिकायें खारिज कीजिये। जी जज साहब जो चयन सूची में है इन्होंने उनको पार्टी भी नही बनाया है जज साहब इनकी याचिका कमजोर है खारिज कीजिये। जी जज साहब पालिसी बनाने का काम सरकार का है उसने नियुक्ति की पालिसी बनाई अब ये इसे चैलेंज नहीं कर सकते इनका लोकस ही नहीं। 
साथ ही AG ने बोला 
*The State Government is well within its right to prepare merit list at the district level for the special reasons that teaching in Basic Primary Schools has to be made in the local dialect and the persons belonging to that district alone are well versed in the local dialect.*
आधिवक्ता आर एन सिंह ने भी AG के हां में हां मिलाई।
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13) पी. एस. बघेल जी ने जोड़ा कि under Article 350A of the Constitution of India, State and every local authority within the State is under legal obligation to provide adequate facility for instruction in the mother tongue at the primary stage of education to the children belonging to linguistic minority groups.
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14) एम डी सिंह शेखर जी ने भी AG की बात को आगे बढ़ाया और बोला कि जो चयन सूची में हैं उन्हें पार्टी बनाया जाना चाहिए था।
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*15) जिला वरीयता बचाने के लिए अधिवक्ताओं की फौज वही जिला वरीयता के विरुद्ध अकेले शैलेंद्र जी। शैलेन्द्र जी ने इन सब को कॉउंटर किया। Union of India and Ors. v. O. Chakradhar, 2002 (2) AWC 1264 (SC) में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया हुआ है कि यदि रायता बड़े स्तर पर फैलाया गया है तो हर एक को नोटिस इशू करना या पार्टी बनाना आवश्यक नहीं है।*
एक एक बात लिखना इस आर्टिकल को अनावश्यक लम्बा कर देगा इसलिए केवल मेन पोइटन्स लिखेंगे। जिला वरीयता को लेकर शैलेंद्र जी ने बोला कि ये अनुच्छेद 15 और 16 का सीधा सीधा उल्लंघन है।
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16) जज साहब ने पूरे मुद्दे पर 7 प्रश्न तैयार किये जिसमें से 5 वां प्रश्न था *Whether the State Government can prepare merit list at the district level instead of State level and the same is violative of Articles 15 and 16 of the Constitution of India?*
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17) Advocate General ने कहा कि 
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● *सहायक अध्यापक का कैडर 1981 नियमावली के हिसाब से लोकल कैडर है। DIET की स्थापना इसलिए ही कि गयी कि उस जिले के बच्चों को स्थानीय अध्यापक मिल सकें। इसका मुख्य उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा को स्थानीय बनाना है और क्षेत्र भी स्थानीयकृत है।*
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● प्रशिक्षण के बाद, यदि कोई भी उम्मीदवार किसी भी  विद्यालय में नियुक्ति के लिए आवेदन करता है, तो आवेदन जिले के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को स्थानांतरित किया जाता है और चयन समिति में जिला स्तर के शिक्षा अधिकारी भी शामिल होते हैं।
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● *वर्तमान विशेष प्रशिक्षण का उद्देश्य जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों में प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाने के लिए जिले के प्राथमिक शिक्षक को उपलब्ध कराना है।*
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● इसके अलावा, सभी शैक्षिक विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा के माध्यम से अपनी पढ़ाई शुरू करनी चाहिए और ऐसा सोचने के पीछे एक बड़ा कारण है। बच्चों को उनकी मातृ भाषा मे न सिखाया जाए तो सीखने की प्रक्रिया अप्राकृतिक हो जाती है और बच्चे तनाव के साथ पढ़ते हैं, जो संपूर्ण प्रक्रिया को यांत्रिक बना देता है। बुनियादी ज्ञान को मातृभाषा के माध्यम से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। 
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● *प्रत्येक राज्य का प्रयास उस क्षेत्र की भाषा को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए। एडवोकेट जनरल ने कहा कि इसी कारण जिला स्तर पर तैयार मेरिट लिस्ट के आधार पर चयन करने का फैसला उचित है।*
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18) अपनी बात को साबित करने के लिए AG ने SC के दो जज्मेन्ट का सहारा लिया। English Medium Students Parents Association v. State of Karnataka and Ors., 1994 (1) SCC 550 और Arun Tiwari v. Zila Mansavi Shikshak Sangh and Ors., 1998 (2) SCC 332.
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*(To be continued....)*



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